ट्रंप के भारत पर 50% टैरिफ का ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर असर: जानिए क्या बदल सकता है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से कुछ उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ का असर अब धीरे-धीरे ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम शॉर्ट-टर्म में परियोजनाओं की लागत बढ़ा सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में घरेलू निर्माण और सप्लाई चेन के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
आयातित ग्रीन टेक महंगा होगा
टैरिफ के कारण अमेरिका से आयात होने वाले सोलर पैनल, विंड टरबाइन और बैटरियों की कीमत बढ़ सकती है।
इससे परियोजनाओं की कुल लागत में वृद्धि होगी।
कुछ प्रोजेक्ट में डिले या बदलाव की भी संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह असर छोटे और मिड-साइज प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा पड़ेगा।
घरेलू निर्माण को बढ़ावा
इस टैरिफ के चलते स्थानीय निर्माता अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
भारत के घरेलू सप्लायरों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
लॉन्ग-टर्म में इससे ग्रीन एनर्जी इंडस्ट्री मजबूत और टिकाऊ होगी।
सप्लाई चेन में बदलाव
कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों की ओर देख रही हैं।
चीन, वियतनाम, मलेशिया और भारत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट का अवसर बढ़ सकता है।
इससे भारत का ग्रीन एनर्जी सेक्टर वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
निवेश और नीति पर असर
शॉर्ट-टर्म में निवेशक सावधान रह सकते हैं और कुछ प्रोजेक्ट्स में डिले हो सकते हैं।
नीति निर्माताओं को संतुलित निर्णय लेने होंगे।
लॉन्ग-टर्म में घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन मजबूत बन सकती है।
ट्रंप के 50% टैरिफ से भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर को शॉर्ट-टर्म में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग-टर्म में अवसर भी हैं:
घरेलू उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा
सप्लाई चेन में सुधार
भारत का ग्रीन एनर्जी सेक्टर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बने